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कृषि-ड्रोन की मूल बातें (छिड़काव और निगरानी),कम मेहनत में अधिक काम करने में मदद!

कृषि-ड्रोन की मूल बातें (छिड़काव और निगरानी)

कृषि ड्रोन (Agri-Drone), जिन्हें मानव रहित हवाई वाहन (UAV) भी कहा जाता है, खेती के तरीकों में एक क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। ये विशेष रूप से खेती के कामों के लिए डिज़ाइन किए गए ड्रोन हैं जो किसानों को उनकी फसलों की बेहतर निगरानी करने और कम मेहनत में अधिक काम करने में मदद करते हैं।# कृषि-ड्रोन की मूल बातें (छिड़काव और निगरानी)

1. कृषि ड्रोन क्या हैं?

ये रिमोट-नियंत्रित या स्वचालित रूप से उड़ने वाले वाहन हैं जिन पर कैमरे, सेंसर और स्प्रे करने वाले टैंक लगे होते हैं। वे खेत के ऊपर उड़कर डेटा इकट्ठा कर सकते हैं या कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव कर सकते हैं।

2. कृषि ड्रोन के मुख्य उपयोग

क) छिड़काव (Spraying)

यह कृषि ड्रोन का सबसे आम और प्रभावी उपयोग है।

 कैसे काम करता है: ड्रोन में लगे टैंक में कीटनाशक, फफूंदनाशक या तरल उर्वरक (जैसे नैनो यूरिया) भरा जाता है। ड्रोन खेत के ऊपर एक समान ऊंचाई और गति से उड़ते हुए सटीक मात्रा में छिड़काव करता है।

फायदे:

    समय की बचत: जो काम मजदूर घंटों या दिनों में करते हैं, ड्रोन उसे मिनटों में कर सकता है। एक एकड़ में छिड़काव करने में मात्र 10-15 मिनट लगते हैं।

    पानी की बचत: ड्रोन बहुत बारीक फुहार (Mist) का उपयोग करते हैं, जिससे पारंपरिक छिड़काव की तुलना में 90% तक पानी की बचत होती है।

    सुरक्षा: किसान कीटनाशकों के सीधे संपर्क में आने से बच जाते हैं।

    समान छिड़काव: यह पूरी फसल पर एक समान छिड़काव सुनिश्चित करता है, जिससे कोई भी हिस्सा छूटता नहीं है।

ख) फसल की निगरानी (Crop Monitoring)

ड्रोन पर लगे उच्च-रिज़ॉल्यूशन और मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमरों की मदद से किसान अपने खेत का एक हवाई सर्वेक्षण कर सकते हैं।

यह क्या जानकारी देता है:

    फसल का स्वास्थ्य: कैमरों से यह पता लगाया जा सकता है कि खेत के किस हिस्से में पौधे कमजोर हैं, कहाँ पोषक तत्वों की कमी है, या कहाँ कीटों का हमला हुआ है।

   सिंचाई की ज़रूरत: यह पता लगाया जा सकता है कि खेत के किस हिस्से में पानी की कमी है।

    फसल की गिनती:यह पौधों की संख्या और घनत्व का अनुमान लगा सकता है।

फायदा: किसान को पूरे खेत में घूमने की ज़रूरत नहीं पड़ती। वह एक ही जगह से पूरे खेत की सेहत पर नज़र रख सकता है और समस्या का पता चलते ही केवल उसी जगह पर कार्रवाई कर सकता है, जिससे लागत कम होती है।

3. ड्रोन पायलट बनने के नियम

भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

रिमोट पायलट सर्टिफिकेट:कृषि ड्रोन उड़ाने के लिए, पायलट को DGCA द्वारा मान्यता प्राप्त किसी ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण लेना और एक रिमोट पायलट सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य है।

ड्रोन का पंजीकरण: हर ड्रोन का UIN (यूनिवर्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर) होना चाहिए, जो DGCA के डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत होता है।

4. ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना

यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित करके उन्हें सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन खरीदने के लिए सब्सिडी दी जाती है और महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और उसकी मरम्मत करने की ट्रेनिंग दी जाती है। ये ‘ड्रोन दीदियां’ फिर अन्य किसानों को किराए पर ड्रोन सेवाएं प्रदान करके अपनी आय अर्जित कर सकती हैं।

प्रेरणादायक कहानी:

*“महाराष्ट्र की एक किसान, स्वाति, ने पारंपरिक खेती में बहुत संघर्ष किया। उसने ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत ट्रेनिंग ली और एक ड्रोन पायलट बन गई। आज, वह अपने गाँव और आसपास के क्षेत्रों में छिड़काव की सेवाएं प्रदान करती है। इससे न केवल उसकी आय तीन गुना हो गई है, बल्कि वह अपने समुदाय में एक प्रेरणा स्रोत भी बन गई है।”

DIY टास्क:

*YouTube पर “Krishi Drone Spraying” या “Agri Drone India” खोजें। देखें कि ड्रोन वास्तव में खेतों में कैसे काम करते हैं। इससे आपको उनकी कार्यप्रणाली और क्षमता का बेहतर अंदाजा लगेगा।

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